आयुर्वेद के अनुसार कोई भी बीमारी अचानक उत्पन्न नहीं होती। हर रोग धीरे-धीरे, चरणबद्ध तरीके से विकसित होता है।चरक संहिता स्पष्ट कहती है —

“न हि रोगाः अकस्माद्भवन्ति”(चरक संहिता, सूत्रस्थान

अर्थात् — रोग बिना कारण और बिना क्रम के उत्पन्न नहीं होते। आयुर्वेद में रोग बनने की प्रक्रिया (षट्क्रियाकाल) आयुर्वेद ने रोग उत्पत्ति को 6 चरणों में समझाया है, जिसेषट्क्रियाकाल कहा जाता है।

1️⃣ संचय (Accumulation) गलत आहार-विहार से

वात, पित्त या कफ अपने-अपने स्थान पर बढ़ने लगते हैं।लक्षण: हल्की थकान,पेट भारी रहना, मन में आलस्य

(इन्हें लोग सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं)

2️⃣ प्रकोप (Aggravation) दोष और अधिक बिगड़ते हैं।लक्षण:गैस, जलन,चिड़चिड़ापन,नींद में कमी

यहीं से शरीर चेतावनी देना शुरू करता है।

3️⃣ प्रसार (Spread) बिगड़े हुए दोष रक्त व शरीर के अन्य भागों में फैलने लगते हैं।

लक्षण: पूरे शरीर में कमजोरी,सिर दर्द,जोड़ों में असहजता

4️⃣ स्थानसंश्रय (Localization)

दोष किसी कमजोर अंग में जाकर टिक जाते हैं। यहीं बीमारी की नींव पड़ती है।

5️⃣ व्यक्त (Manifestation) अब रोग स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। इसी चरण में लोग कहते हैं: “अचानक बीमारी हो गई” जबकि प्रक्रिया पहले से चल रही होती है।

6️⃣ भेद (Complication) यदि इलाज न हो तोरोग जटिल और पुराना हो जाता है। आयुर्वेद की विशेषता आयुर्वेद का उद्देश्य है —तीसरे या चौथे चरण में ही दोषों को शांत करना, ताकि बीमारी बने ही नहीं। इसीलिए आयुर्वेद में कहा गया है —“स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं” अर्थात् —स्वस्थ व्यक्ति का स्वास्थ्य बनाए रखना और रोगी के रोग को शांति देना। आधुनिक दृष्टि से भी सत्य आज की आधुनिक चिकित्सा भी मानती है कि —हाई BP, डायबिटीज, आर्थराइटिस, पाचन विकार। ये सब धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारियाँ हैं, अचानक नहीं।

निष्कर्ष (Conclusion) बीमारी अचानक नहीं होती।बीमारी धीरे-धीरे बनती है। जो संकेतों को समझ लेता है, वह रोग से पहले ही बच जाता है। आयुर्वेद इन्हीं संकेतों का विज्ञान है।

नोट (Fact-based clarity)

यह जानकारी चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदयम्

में वर्णित सिद्धांतों पर आधारित है।

 

By Rajnesh Kushwaha

Dr. Rajnesh Kushwaha PT (Chief Editor) Qualified Health Professional, Health Educator & Legal Analyst – The Pharmacist डॉ रजनीश एक योग्य हेल्थ प्रोफेशनल, हेल्थ एजुकेटर एवं मुख्य संपादक हैं, जो The Pharmacist से जुड़े हुए हैं। उन्होंने BPT, MPT (Ortho),D. Pharm, DNYS, MD (AM) तथा विधि स्नातक (LLB) जैसी अकादमिक एवं व्यावसायिक योग्यताएँ प्राप्त की हैं। ऑर्थोपेडिक पुनर्वास, न्यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी, मेडिसिन सेफ्टी तथा हेल्थकेयर कानून एवं नियमों के क्षेत्रों में उनके बहुविषयक अनुभव के आधार पर उनका कार्य मुख्य रूप से जनस्वास्थ्य जागरूकता, दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, रोगी सुरक्षा तथा फिजियोथेरेपी आधारित रोकथाम पर केंद्रित है। वे साक्ष्य-आधारित शैक्षणिक लेखन के माध्यम से आम लोगों, फार्मेसी स्टूडेंट्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को मेडिकल रिपोर्ट, सामान्य लक्षण, दवाओं के सही उपयोग, तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य चिकित्सा, फिजियोथेरेपी और कानून के समन्वय से सही जानकारी को आम जनता तक पहुँचाना, गलतफहमियों को दूर करना तथा सुरक्षित और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है। 🔹 Areas of Expertise Orthopaedic Rehabilitation Neurology & Rheumatology Physiotherapy & Allied Health Practice Medicine Safety & Rational Drug Use Healthcare Regulations & Medical Law Public Health Awareness & Patient Safety ⚖️ Disclaimer यह सभी सामग्री केवल शैक्षणिक एवं जनजागरूकता उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर चिकित्सा या कानूनी परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य या कानूनी निर्णय से पूर्व योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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