Latest Legal Update: ‘Dr.’ Prefix विवाद में नया ट्विस्ट
भारत में ‘Dr.’ prefix को लेकर चल रही बहस अब एक नए कानूनी मोड़ पर पहुँच गई है। केरल हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान Bench ने मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि अदालत स्वयं कानून नहीं बना सकती और यह तय करना कि कौन ‘Dr.’ prefix इस्तेमाल कर सकता है, सरकार या विधायिका का विषय है।
यह टिप्पणी healthcare professionals, physiotherapists, allied health professionals और medical community के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: फिजियोथेरपिस्ट ‘Dr.’ लिख सकते हैं, IAPMR केस खारिज ।
🟢 केस की पृष्ठभूमि: विवाद की शुरुआत
Indian Association of Physical Medicine and Rehabilitation (IAPMR) द्वारा दायर याचिका में मांग की गई थी कि ‘Dr.’ prefix के उपयोग को सीमित किया जाए और इसे विशेष रूप से कुछ चिकित्सा पेशेवरों तक रखा जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि allied health professionals द्वारा ‘Dr.’ लिखने से जनता में भ्रम पैदा हो सकता है।
लेकिन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अलग दृष्टिकोण सामने रखा।
👉 Full case analysis पढ़ें:
“अब कौन-कौन ‘Dr.’ लिख सकता है? हाई कोर्ट वरडिक्ट के बाद पूरी कानूनी सच्चाई”
🏛️ Bench की बड़ी टिप्पणी — “हम कानून नहीं बना सकते”
सुनवाई के दौरान Bench ने कहा:
“आपको कानून में संशोधन करवाना होगा। हम यहाँ बैठकर कानून नहीं बना सकते… कानून बनाना विधायिका का काम है… अदालत यह तय नहीं कर सकती कि कोई ‘Dr.’ prefix लगा सकता है या नहीं।”
इस observation का मतलब है कि अदालत policy या legislative decision नहीं ले सकती।
🔴 Judiciary vs Legislature: फर्क समझना जरूरी
कई लोगों को लगता है कि कोर्ट हर चीज तय कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है।
✔ Judiciary
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कानून की व्याख्या करती है
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विवाद सुलझाती है
❌ Legislature
-
नया कानून बनाती है
इसलिए Bench ने कहा कि अंतिम निर्णय सरकार को लेना होगा।
🟡 इसका मतलब healthcare professionals के लिए क्या है?
यह observation physiotherapists और allied health professionals के लिए खास मायने रखता है।
👉 कोर्ट ने:
✔ ‘Dr.’ prefix पर तुरंत रोक नहीं लगाई
✔ exclusive right घोषित नहीं किया
मतलब — स्थिति अभी evolving है।
🟢 NMC Act और NCAHP Act क्या कहते हैं?
1️⃣ National Medical Commission Act
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Medical practice regulate करता है
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लेकिन ‘Dr.’ title को exclusive घोषित नहीं करता
2️⃣ NCAHP Act
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Allied health professionals को regulate करता है
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Professional identity clarity पर जोर देता है
🔴 BNS (भारतीय न्याय संहिता) का कानूनी angle
अगर कोई व्यक्ति ‘Dr.’ लिखकर खुद को medical doctor बताकर मरीजों को भ्रमित करता है, तो:
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Cheating
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Impersonation
जैसे अपराध लागू हो सकते हैं।
🟡 Government की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
Bench ने कहा कि:
👉 Policy बनाना सरकार का काम है।
इसका मतलब:
अब pressure legislative bodies पर shift हो गया है।
🟢 आगे क्या हो सकता है?
संभावित scenarios:
1️⃣ Government guidelines जारी करे
2️⃣ Professional councils recommendations दें
3️⃣ National level regulation बने
❓ FAQ – ‘Dr.’ Prefix पर कानूनी सवाल
क्या कोर्ट ने ‘Dr.’ prefix allow कर दिया?
नहीं। कोर्ट ने कहा कि यह legislative decision है।
क्या physiotherapist ‘Dr.’ लिख सकते हैं?
स्पष्ट qualification के साथ
क्या अभी कानून final है?
नहीं। Government intervention संभव है।
🟢 निष्कर्ष
Kerala High Court की टिप्पणी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अदालत कानून नहीं बना सकती। ‘Dr.’ prefix पर अंतिम निर्णय सरकार या विधायिका को लेना होगा।
इसलिए अभी सबसे महत्वपूर्ण है:
✔ ethical practice
✔ transparency
✔ legal awareness
Author
Dr Rajneesh Kushwaha PT
Allied Health Professional | Pharmacist | Legal Graduate (LLB)
Chief Editor — The Pharmacist
