भारत में फिजियोथेरेपी आज केवल सहायक इलाज तक सीमित नहीं रही। ऑर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजी, स्पोर्ट्स इंजरी और रिहैबिलिटेशन जैसे क्षेत्रों में फिजियोथेरेपिस्ट मरीज के इलाज की रीढ़ बन चुके हैं। लेकिन इसी के साथ एक पुराना विवाद लगातार चलता रहा है – क्या फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे “Dr.” लिख सकते हैं?

यह सवाल केवल सम्मान का नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार, मरीज की सुरक्षा और प्रोफेशन की पहचान से जुड़ा हुआ है। जनवरी 2026 में केरल हाई कोर्ट में इसी विषय पर चले एक बड़े केस का फैसला आया, जिसने पूरे देश में काम कर रहे फिजियोथेरेपिस्टों और हेल्थ स्टूडेंट्स का ध्यान अपनी ओर खींचा।

“Dr.” शब्द का कानूनी अर्थ

भारत में “Doctor” शब्द केवल MBBS तक सीमित नहीं है। वर्षों से यह शब्द कई वर्गों द्वारा वैध रूप से प्रयोग किया जाता रहा है:

  • PhD धारक (शैक्षणिक डॉक्टर)
  • Dentist (BDS)
  • Ayurveda व Homeopathy चिकित्सक
  • कुछ Allied Health Professionals भी अपनी योग्यता के साथ प्रयोग करते हैं

कानून का मूल सिद्धांत यह है कि:

“कोई भी व्यक्ति अपनी शैक्षणिक या पेशेवर उपाधि का प्रयोग कर सकता है, बशर्ते वह जनता को भ्रमित न करे।”

Physiotherapy की वैधानिक पहचान

National Commission for Allied and Healthcare Professions Act, 2021 (NCAHP Act) के तहत:

  • Physiotherapist को मान्यता प्राप्त “Allied & Healthcare Professional” माना गया है
  • उन्हें स्वतंत्र हेल्थ प्रोफेशनल का दर्जा दिया गया है
  • पूरे एक्ट में कहीं भी यह नहीं लिखा कि वे “Dr.” शब्द का प्रयोग नहीं कर सकते

यानी, फिजियोथेरेपी एक कानूनी और वैध प्रोफेशन है, न कि अवैध प्रैक्टिस।

IMPORTANT UPDATE – केरल हाई कोर्ट का फाइनल फैसला (22 जनवरी 2026)

केस का संक्षिप्त विवरण

  • कोर्ट: केरल हाई कोर्ट
  • केस टाइप: WP(C) – रिट याचिका (सिविल)
  • केस नंबर: WP(C) No. 41064 / 2025
  • याचिकाकर्ता: Indian Association of Physical Medicine and Rehabilitation (IAPMR)
  • प्रतिवादी: भारत सरकार, NCAHP, स्टेट एलाइड हेल्थ काउंसिल, NMC, Indian Association of Physiotherapists, AIOTA, KAPC व अन्य
  • पहली सुनवाई: 04 नवम्बर 2025
  • अंतिम निर्णय: 22 जनवरी 2026
  • न्यायाधीश: माननीय श्री न्यायमूर्ति V. G. Arun
  • केस स्टेटस: DISPOSED
  • Nature of Disposal: DISMISSED

“Dismissed” का अर्थ क्या है?

IAPMR ने अदालत से यह मांग की थी कि Allied Health Professionals एवं Physiotherapists पर “Dr.” prefix के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए।

लेकिन:

  • हाई कोर्ट ने यह याचिका पूरी तरह खारिज कर दी
  • कोर्ट ने कोई रोक या नई गाइडलाइन जारी नहीं की
  • “Dr.” prefix पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया

Status Quo जारी रहेगा

कोर्ट के आदेश के बाद:

  • जो व्यवस्था पहले चल रही थी
  • जो NCAHP Physiotherapy एवं Occupational Therapy Curriculum Recommendation में मान्य थी

वही स्थिति आगे भी जारी रहेगी

अर्थात:

Physiotherapists द्वारा “Dr.” prefix का प्रयोग पहले की तरह वैध बना रहेगा, बशर्ते वे अपनी योग्यता स्पष्ट रूप से लिखें और मरीज को भ्रमित न करें।

“Dr.” लिखने से क्या लाभ होते हैं?

1️⃣ पेशेवर पहचान मजबूत होती है

“Dr. (Physio)” लिखने से समाज में फिजियोथेरेपिस्ट की पहचान एक गंभीर और योग्य हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में बनती है।

2️⃣ शिक्षा और मेहनत का सम्मान

BPT, MPT और PhD जैसे कोर्स कठिन और वर्षों की मेहनत मांगते हैं। “Dr.” लिखना उस शैक्षणिक उपलब्धि का सम्मान है।

3️⃣ मरीज का भरोसा बढ़ता है

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मरीज अधिक भरोसे के साथ इलाज लेते हैं। सही पहचान से उपचार का प्रभाव भी बेहतर होता है।

4️⃣ NCAHP Act से कानूनी सुरक्षा

फिजियोथेरेपिस्ट को अब केंद्र सरकार के कानून द्वारा मान्यता प्राप्त सुरक्षा प्राप्त है।

आम सवाल-जवाब (FAQ)

प्रश्न 1: क्या फिजियो कानूनी तौर पर “Dr.” लिख सकते हैं?
उत्तर: हाँ, लेकिन योग्यता के साथ – जैसे Dr. X (PT) या Dr. X, MPT (Physiotherapy)।

प्रश्न 2: केरल हाई कोर्ट केस से कोई बैन लगा?
उत्तर: नहीं। केस dismiss हुआ, कोई स्थायी प्रतिबंध नहीं लगा।

प्रश्न 3: NCAHP Act क्या सुरक्षा देता है?
उत्तर: यह एक्ट फिजियो को वैधानिक पहचान और कानूनी संरक्षण देता है।

निष्कर्ष

केरल हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है:

  • IAPMR की याचिका खारिज
  • “Dr.” prefix पर कोई रोक नहीं
  • Status quo जारी
  • NCAHP Act से मजबूत कानूनी सुरक्षा

लेकिन अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है, तभी उनका प्रोफेशन सुरक्षित भी रहेगा और सम्मानित भी।


(यह लेख शैक्षणिक व जागरूकता उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी व्यक्तिगत विवाद में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय व प्राधिकरण पर निर्भर करेगा।)

https://thepharmacist.in/ppr-2015-pharmacist-scope-truth/

By Rajnesh Kushwaha

Dr. Rajnesh Kushwaha PT (Chief Editor) Qualified Health Professional, Health Educator & Legal Analyst – The Pharmacist डॉ रजनीश एक योग्य हेल्थ प्रोफेशनल, हेल्थ एजुकेटर एवं मुख्य संपादक हैं, जो The Pharmacist से जुड़े हुए हैं। उन्होंने BPT, MPT (Ortho),D. Pharm, DNYS, MD (AM) तथा विधि स्नातक (LLB) जैसी अकादमिक एवं व्यावसायिक योग्यताएँ प्राप्त की हैं। ऑर्थोपेडिक पुनर्वास, न्यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी, मेडिसिन सेफ्टी तथा हेल्थकेयर कानून एवं नियमों के क्षेत्रों में उनके बहुविषयक अनुभव के आधार पर उनका कार्य मुख्य रूप से जनस्वास्थ्य जागरूकता, दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, रोगी सुरक्षा तथा फिजियोथेरेपी आधारित रोकथाम पर केंद्रित है। वे साक्ष्य-आधारित शैक्षणिक लेखन के माध्यम से आम लोगों, फार्मेसी स्टूडेंट्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को मेडिकल रिपोर्ट, सामान्य लक्षण, दवाओं के सही उपयोग, तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य चिकित्सा, फिजियोथेरेपी और कानून के समन्वय से सही जानकारी को आम जनता तक पहुँचाना, गलतफहमियों को दूर करना तथा सुरक्षित और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है। 🔹 Areas of Expertise Orthopaedic Rehabilitation Neurology & Rheumatology Physiotherapy & Allied Health Practice Medicine Safety & Rational Drug Use Healthcare Regulations & Medical Law Public Health Awareness & Patient Safety ⚖️ Disclaimer यह सभी सामग्री केवल शैक्षणिक एवं जनजागरूकता उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर चिकित्सा या कानूनी परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य या कानूनी निर्णय से पूर्व योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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