नई दिल्ली। फार्मासिस्ट पद पर भर्ती के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) को न्यूनतम अनिवार्य योग्यता मानने के नियम को सही ठहराया गया है। Supreme Court of India ने इस संबंध में Patna High Court के फैसले को बरकरार रखते हुए उसके खिलाफ दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया।

पटना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य सरकार को फार्मासिस्ट पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने का अधिकार है और D.Pharm को न्यूनतम योग्यता मानना पूरी तरह वैधानिक है। इस फैसले को चुनौती देते हुए B.Pharm और M.Pharm डिग्री धारकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के तर्कों से सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि किसी पद के लिए न्यूनतम योग्यता तय करना नीति निर्धारण का विषय है, जिसमें न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा, जब तक नियम असंवैधानिक न हों। कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती की योग्यता को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है।

इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि बिहार में फार्मासिस्ट पद पर भर्ती के लिए डिप्लोमा इन फार्मेसी अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी और केवल उच्च डिग्री होने के आधार पर भर्ती का दावा नहीं किया जा सकता।

मामला क्या था?

बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती के लिए D.Pharm को न्यूनतम योग्यता तय किया गया था।

B.Pharm और M.Pharm धारकों ने इसे चुनौती देते हुए दलील दी कि उच्च डिग्री होने के बावजूद उन्हें अयोग्य ठहराया जा रहा है।

पटना हाई कोर्ट ने पहले ही राज्य के नियम को वैध माना था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी।

यानी, D.Pharm को न्यूनतम योग्यता मानने का नियम कानूनी रूप से सही है।

इस फैसले के बाद बिहार में फार्मासिस्ट भर्ती योग्यता को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया।

📌 नोट: यह फैसला भविष्य की फार्मासिस्ट भर्तियों में योग्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

By Rajnesh Kushwaha

Dr. Rajnesh Kushwaha PT (Chief Editor) Qualified Health Professional, Health Educator & Legal Analyst – The Pharmacist डॉ रजनीश एक योग्य हेल्थ प्रोफेशनल, हेल्थ एजुकेटर एवं मुख्य संपादक हैं, जो The Pharmacist से जुड़े हुए हैं। उन्होंने BPT, MPT (Ortho),D. Pharm, DNYS, MD (AM) तथा विधि स्नातक (LLB) जैसी अकादमिक एवं व्यावसायिक योग्यताएँ प्राप्त की हैं। ऑर्थोपेडिक पुनर्वास, न्यूरोलॉजी, रूमेटोलॉजी, मेडिसिन सेफ्टी तथा हेल्थकेयर कानून एवं नियमों के क्षेत्रों में उनके बहुविषयक अनुभव के आधार पर उनका कार्य मुख्य रूप से जनस्वास्थ्य जागरूकता, दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, रोगी सुरक्षा तथा फिजियोथेरेपी आधारित रोकथाम पर केंद्रित है। वे साक्ष्य-आधारित शैक्षणिक लेखन के माध्यम से आम लोगों, फार्मेसी स्टूडेंट्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को मेडिकल रिपोर्ट, सामान्य लक्षण, दवाओं के सही उपयोग, तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं। उनका उद्देश्य चिकित्सा, फिजियोथेरेपी और कानून के समन्वय से सही जानकारी को आम जनता तक पहुँचाना, गलतफहमियों को दूर करना तथा सुरक्षित और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है। 🔹 Areas of Expertise Orthopaedic Rehabilitation Neurology & Rheumatology Physiotherapy & Allied Health Practice Medicine Safety & Rational Drug Use Healthcare Regulations & Medical Law Public Health Awareness & Patient Safety ⚖️ Disclaimer यह सभी सामग्री केवल शैक्षणिक एवं जनजागरूकता उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार से पेशेवर चिकित्सा या कानूनी परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य या कानूनी निर्णय से पूर्व योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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